E-Commerce क्या है? इसके Types, advantages, disadvantages


ई कॉमर्स क्या है? इसके प्रकार  फायदे और नुकसान क्या है ये आज हम जानेंगे.

E-commerce kya hai? types

अगर आप इन्टरनेट पर खुद का बिज़नस शुरू करना चाहते है तो उससे पहले e-commerce क्या है? ये कैसे वर्क करता है इसके बारे में जानना बहुत जरुरी है.

ई कॉमर्स क्या है?

e-commerce का मतलब है इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स. याने इन्टरनेट के जरिये अपना बिज़नस इन्टरनेट पर करना.  इन्टरनेट के माध्यम से चीजों को खरीदना या बेचना.
उदाहरण :
मान को आप इन्टरनेट के जरिये किस वेबसाइट से मोबाइल खरीदते है, या फिर अपना पुराना मोबाइल इन्टरनेट पर बेच देते है. तो इसको e-commerce कहा जाता है.



E-कॉमर्स वेबसाइट:
Amazon, Flipcart, e-bay, etc.

इसकी शुरवात 1990 में हुई थी, तब से आज तक  ये इतना बढ़ गया है की आज हर कोई प्रोडक्ट आपको ऑनलाइन मिल रहा है.  आज इन्टरनेट पर आपको कपडे, मोबाइल्स,  फूड्स, सबकुछ मिल रहा है, ये मुमकिन हुआ है e-commorce की बदोलत.
इसमें हमे पेमेंट भी virtually करना पड़ता है. याने हम खुद जाकर पैसे देने की जरुरत नहीं होती है. हम अपने क्रेडिट, डेबिट, इन्टरनेट बैंकिंग से पेमेंट कर सकते है.
इसमें कुछ important फैक्टर होते है:
१. EDI – इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज
2. Email – इलेक्ट्रॉनिक मेल
३. EFT – इलेक्ट्रनिक फण्ड ट्रान्सफर जिसे e-Cash भी कहा जाता है.


ई कॉमर्स के कुछ features:

१. Hard Cash की जरुरत नहीं:
इसमें हमे हार्ड  कॅश की जरुरत नहीं होती है. हम पेमेंट के लिए क्रेडिट, डेबिट कार्ड से पेमेंट कर सकते है.

2. २४*7 कभी भी avaliable:
दिन में २४ घंटे और वीक के ७ डे, दिन तो या रात हम कभी भी ई -कॉमर्स use कर सकते है.

३. Support :
आपको यहाँ पे अगर कुछ प्रॉब्लम आ जाती है तो आपको इसके लिए फुल सपोर्ट, वेबसाइट की तरफ से मिलता है, आप अपनी प्रॉब्लम वेबसाइट पर पुच सकते है.



४. अनलिमिटेड प्रोडक्ट्स:
जब हम बजार में शौपिंग के लिए जाते है तब हमे कुछ गिने चुने प्रोडक्ट्स ही मिलते है. लेकिन आपको ऑनलाइन अनलिमिटेड प्रोडक्ट मिलते है. लेटेस्ट से लेटेस्ट प्रोडक्ट आपको यहाँ पे मिल जाता है.

ई –कॉमर्स के फायदे (Advantages):

जब हम ई-कॉमर्स का use करते है तब इसके फायदे क्या है, इसका use क्यों करे ये भी जानना जरुरी है.
ई –कॉमर्स से सभी को फायदा होता है, चाहे वो consumer, या organization का ओनर हो.
१. ई –कॉमर्स की मदद से बिज़नस को पूरी दुनिया में फैला सकते है. ये हमारी देश ही सिमित न रहकर आप इसको वर्ल्ड वाइड पब्लिश कर सकते है.
2. कस्टमर को प्रोडक्ट खरीदने के लिए कही पर जाने की जरुरत नहीं है,  घर बैठकर कोई भी प्रोडक्ट खरीद सकते है.
३. किसी भी चीज़ को ठीक तरह से जाच पड़तालकर, दुसरे प्रोडक्ट के साथ compare भी कर सकते है.
४. ई कॉमर्स से पेपर वर्क बहुत ही कम होने लगा है.
5. इससे organization को काफी फायदा मिलता है, क्यों की इसमें जो बिच के डिस्ट्रीब्यूटर होते है उनकी जरूरत नहीं पड़ती है.
6. प्रोडक्ट के बारे में हम रिव्यु, कमेंट में बता सकते है, ताकि दुसरे को वो चीज़ खरीदते समय समज में आये की चीज़ के बारे में दुसरे लोगो की क्या राय है.

ई –कॉमर्स के नुकसान (Disadvantages):

किसी भी चीज़ के दो पहलू होते है. एक अच्छा तो एक बुरा वैसे ही e-commerce के कुछ नुकसान भी है.
१. E-commerce वेबसाइट, एप्लीकेशन बनाने के लिए काफी खर्च होता है.
2. सिक्यूरिटी के बारे में हमशा सतर्क रहना पड़ता है. क्यों की इसमें बहुत सरे सिक्यूरिटी issue को फेस करना पड़ता है.
३. किसी भी न्यू वेबसाइट पर भरोसा करना थोडा मुश्किल है.
४. हाई स्पीड इन्टरनेट की जरूरत पड़ती है.
5. कई सारे villages में प्रोडक्ट आपको नहीं मिल पाते .
6. इन्टरनेट के बारे में आपको बेसिक जानकारी होनी चाहिए.


ई –कॉमर्स Types:

ई कॉमर्स के वैसे तो ७ प्रकार है. लेकिन उनमे से हम ३ के बारे में यहाँ पे जानेगे. क्यों की बहुत सी जगह पर हम इसका use करते है.
१. B2B (Business To Business)
इसमें एक बिज़नस organization दूसरी organization से डायरेक्ट बिज़नस करती है. जैसे की कोई व्होलसेलर बड़ी कंपनी से डायरेक्ट कुछ प्रोडक्ट ख़रीदते है.



2. B2C (Business To Consumer )
ये सबसे ज्यादा use होने वाला e-commerce का प्रकार है. यहाँ पे बिज़नस organization अपने प्रोडक्ट वेबसाइट पर डालती है जहा से consumer वो चीज़ खरीद सकते है. इसमें जो बिच में के distributor होते है उनकी जरुरत नहीं होती है.
उदाहरण :
जैसे हम filpkart, amazon ये जो वेबसाइट है ये B2C टाइप में आते है.

३. C2C (Consumer To Consumer )
इसमें कोई भी consumer दुसरे consumer को अपना बेच या खरीद सकता है.  जैसे हम अपनी पुराणी फोर विलर बेच सकते है.
Quicker ये जो वेबसाइट है , ये C2C टाइप में आती है. Quicker हम कोई भी चीज़ बेच या खरीद सकते है.
Other टाइप्स :
4. C2B (Consumer To Business)
5. B2G (Business To Government)
6. G2B (Government To Business)
7. G2C (Government To Citizen)


ई-कॉमर्स का use दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है. इसके वहज से कई चीज़े बहुत ही आसन हो गयी है. लेकिन इसका use करते समय हमे सिर्फ सिक्यूरिटी के बारे में थोडा सा सोचना पड़ता है.

Author:

Professional Bloggger and Author of Hindimeearn.com Completed Master Degree in Computer Science.Passionate about Blogging,Make Money and Web-Designing.Best Knowledge of HTML,PHP,.NET,C,C++ and other programming languages. Know More About Me...

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2 comments

9 August 2016 at 01:20

Bahut hi badhiya jaankari share ki hai aapne bro,, mera bhi blog check karke bataye ki kaisa hai..ami bhi ek hinglish blogger hu.... HelpMeMore

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9 August 2016 at 03:56

#Md Saban Ji Thank's. Aur Ha Aapki Website Bahut Acchi Hai.

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