Database Management System Definition DBMS In Hindi

Database Management System Definition DBMS In Hindi
Database management system याने DBMS की Definition क्या है, आज हम जानने वाले है.
Data Definition: data is nothing but collection of facts. डाटा याने अगल अगल चीजों का कलेक्शन होता है, याने इमेज, विडियो, ऑडियो, टेक्स्ट etc.


Database : database is nothing but collection of  related data,
डेटाबेस याने डाटा का कलेक्शन होता है. जिसकी मदद से हम डाटा से useful इनफार्मेशन एक्सेस कर सके.
उदाहरण:
क्या कभी आपने सोचा है, की हम फेसबुक, जीमेल, जैसी वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाते है, तो हमारी इनफार्मेशन आखिर सेव कहा होती है. हम जो फेसबुक पे विडियो, इमेज अपलोड करते है, वो कहा जाकर सेव होती है.
तो इसका जवाब है, हमारी जो भी अकाउंट की इनफार्मेशन होती है, जैसे हमारा, नाम, एड्रेस etc. वो फेसबुक के database में जाके सेव हो जाती है.
हम जब भी हमारा फेसबुक अकाउंट log in करते है, तब उसी database की इनफार्मेशन को एक्सेस किया जाता है. और हम अपने फेसबुक अकाउंट में log in कर पाते है.


Database Management System Definition

Database management system save data in such a way which can used to manipulate, retrieve, update and produce useful information.
database management सिस्टम एक प्रकार का सॉफ्टवेर होता है, जिसमे हम डाटा को इस प्रकार सेव करते है, जिसकी मदद से हम डाटा को एडिट, अपडेट, कर सकते है.
Example of Database:
MS- Access, SQL, Oracle etc.

Database Users:
database यूजर को अलग अलग rights और परमिशन दी जाती है. कई यूजर सिर्फ डाटा को देख सकते है, तो कई यूजर उस डाटा को एडिट , अपडेट कर सकते है.

1. Administrator:
ये वो यूजर होता हिया, जो database को मैनेज करने का काम करता है. इसके पास database के सभी right, और permission होती है.

2. End Users:
एंड यूजर याने हमारे जैसे लोग जो सिर्फ डाटा का use करते है. याने ये जो यूजर होते है, वो सिर्फ database management सॉफ्टवेर का इस्तमाल करके डाटा को एक्सेस करते है.
सभी database management system Atomicity, Consistency, Isolation, and Durability (ACID) प्रॉपर्टीज है.

Database का इस्तमाल large अमाउंट of डाटा को सेव करने के लिए किया जाता है. और database management system software का इस्तमाल इसी डाटा पर ऑपरेशन करने के लिए किया जाता है.
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Networking Types In Computer

Networking Types In Computer
Computer Network के types बारे में आज हम जानते है, बेसिक नेटवर्किंग टाइप्स के बारे में discuss करते है.

Computer Network Types In Hindi


Network को basically उसके geographical area के अनुसार विभाजित किया गया है. Network छोटे से छोटा याने एक मोबाइल और computer के बिच हो सकता है, या फिर बड़े से बड़ा याने internet की तरह हो सकता है जिसने पुरे world को कवर किया हुआ है..



Geographical area के अनुसार network के निचे दिए गए types है:

1. LAN (Local Area Network):
इस प्रकार का network किसी बिल्डिंग में सेटअप किया जाता है, जिसमे कई system को एक साथ कनेक्ट किया जाता है.
Local area network covers कॉलेज, organization, स्कूल, यूनिवर्सिटीज एरिया. LAN में हम 2 सिस्टम का network बना सकते है, या बड़े से बड़ा 50-100 तक भी बना सकते है.
LAN के जरिए हम डाटा, रिसोर्सेज, को शेयर कर सकते है. LAN के जरिए हम, प्रिंटर, स्कैनर, और इन्टरनेट इन जैसे रिसोर्सेज को यूजर के साथ शेयर कर सकते है.
LAN wireless या फिर wired दोनों प्रकार का हो सकता है. LAN में हम 1 किलोमीटर की दुरी पर से दे डाटा सेंड या रिसीव कर सकते है.

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2. MAN (Metropolitan Area Network):
MAN किसी शहर के लिए डिजाईन किया जाता है. इसका बेस्ट  उदाहरण है, Cable TV Network. केबल टीवी network सिर्फ एक शहर के लिए ही डिजाईन किया जाता है.  MAN में हम कई LAN को कनेक्ट कर सकते है.
MAN में हाई-कैपेसिटी और हाई स्पीड के fiber optic cable का इस्तमाल किया जाता है.

3. WAN (Wide Area Network):
इसके नेम से ही पता चलता है, वाइड याने बहुत बड़ा नेटवर्क. WAN में large geographical area को कवर किया जाता है. WAN से जुड़े सभी computer से हम कई हज़ार किलोमीटर तक डाटा को सेंड / रिसीव कर सकते है.
WAN में कई तरह के LAN, MAN को कनेक्ट किया जाता है.
वाइड एरिया नेटवर्क में डाटा को सेंड/ रिसीव करने के लिए communication satellite का इस्तमाल किया जाता है. WAN का उदाहरण देखा जाए तो हम इन्टरनेट ले सकते है.
इन्टरनेट से कई प्रकार के network आपस में कनेक्ट होते है. जिसके जरिए हम हमारा डाटा को आपस में शेयर करते रहते है.
तो ये बेसिक network के types है, जिसका प्रयोग किसी भी networking में किया जाता है. वैसे तो और भी प्रकार है, जैसे SAN, PAN etc. पर ऊपर दिए गए 3 मोस्ट important टाइप्स है.


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Delete Temporary Files by Using Disk Cleanup Utility in Windows 7, 8

Delete Temporary Files by Using Disk Cleanup Utility in Windows 7, 8
Windows 7, 8 में Temporary files को disk cleanup utility के जरिए delete कैसे किया जाता है, आज हम जानते है.
Windows operating सिस्टम में जो Temporary files होती है, वो junk files होती है. जिसका task कम्पलीट होने के बाद हमारे system में कोई उपयोग नहीं होता है.

Delete Temporary files by disk clean up utility

इसलिए हमे इस फाइल को delete करना पड़ता है. इन फाइल्स को कोई काम न होने से हमारे disk space waste होता है.
windows में इन फाइल्स को delete करने के लिए इनबिल्ट utility दी है, जिसका नाम है, disk clean up utility. इसके जरिए कैसे फाइल्स को delete किया जाता है, आज हम देखते है.


Windows 10, 8, 7 Temporary Files को Delete करने की स्टेप्स:

मै यहाँ पे windows 7 का use कर रहा हु. लेकिन windows 8,10 में भी आपको यही स्टेप को फॉलो करना है.
स्टेप 1:
Start – All Programs – Accessories – System Tool – Disk Clean up इस प्रोसेस को फॉलो करे.
Or
Search Box Disk clean up डाले और Enter प्रेस करे.

स्टेप 2:
अब आपके सामने Disk selection window में C drive सेलेक्ट होगा सिर्फ Ok करे.

Drive select kare

स्टेप 3:
अब disk clean up utility टेम्पररी फाइल्स को स्कैन करेगा. थोड़ी देर तक वेट करे.

Thoda wait kare

स्टेप 4:
अब हमारे सामने एक विंडो ओपन होगी जिसमे सभी तरह की system errors, temporary files, thumbnails, windows errors को सलेक्ट करे और ok पे click करे.

Files select kare

स्टेप 5:
पॉपअप विंडो में फिर से पूछा जायेगा की सुच में फाइल्स को delete करना चाहते है, delete files पर click  करे.

स्टेप 6:
फाइल्स को delete होने में थोडा टाइम लगेगा थोड़ी देर तर वेट करे. अब finally आपको फाइल्स delete हो जाएगी.
यही प्रोसेस हमे windows 8,10 में फॉलो करनी है.

Alternative Method:

हमे disk clean up utility को डायरेक्ट भी एक्सेस कर सकते है. उसके लिए हमे निचे दी गयी स्टेप को फॉलो करना है.

स्टेप 1:
c drive पे जाके right click करे फिर प्रॉपर्टीज पर क्लिक करे. अब आपके सामने निचे की तरह इमेज दिखाई देगी.

C drive pe right click kare

स्टेप 2:
उसमे निचे disk clean up पर click करना है. और ऊपर दी गयी स्टेप 3 से आगे की प्रोसेस को फॉलो करना है.
तो इस प्रकार हम सिंपल disk clean up utility की help से computer में जो junk files, temporary files होती है, उनको रिमूव कर सकते है.
अगर आपको ऊपर दी गयी किस स्टेप में कोई प्रॉब्लम हो तो आप कमेंट में जरुर बताये.
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Computer Ki Khoj (Invention) Kisne Ki

Computer Ki Khoj (Invention) Kisne Ki
आज हमारे अधिकतर काम computer के जरिए ही पूरे होते है. सभी के पास घर, ऑफिस में computer available है. आज हम इसी computer की हिस्ट्री के बारे में जानने वाले है, आखिर कौन वो वक्ती है, जिसने इस महान चीज़ का अविष्कार किया होगा?

Computer ki Khoj

Computer की खोज :

जब भी computer किसने बनाया ये सवाल पुछा जाता है, तब charles babbage का नाम सभी की जुबान पर आता है.
लेकिन क्या ये सच है? एक तरह से देखा जाए तो charles babbage को computer का father कहा जाता है. उनोने 1822 में फर्स्ट mechanical computer बनाया था.
लेकिन उस computer को आज का एडवांस computer बनाने में कई सरे लोगो को हाथ है. तो आज के इस एडवांस computer का श्रेय किसी एक वक्ती को नहीं दिया जा सकता है.
फर्स्ट टाइम computer इस शब्द का इस्तमाल 1613 में किया गया जिसका मतलब था, कैलकुलेशन या फिर कम्प्यूटेशन.

पहला Mechanical computer / automatic computing engine :
1822 में Charles Babbage ने फर्स्ट automatic computing machine का निर्माण किया था. यह मशीन लिमिटेड प्रकार के कैलकुलेशन करने में इस्तमाल की जाती थी. और इसका रिजल्ट हमे हार्ड कॉपी में मिल जाता था.
पैसो की कमी से charles babbage इस मशीन पर आगे काम न कर सके.
1837 में Charles Babbage ने पहला general mechanical computer जिसमे arithematic logic unit और फ्लो कण्ट्रोल का इस्तामाल किया गया था.

पहला Programmable computer:
पहला Programmable computer Z1 का निर्माण Konrad Zuse जो की एक जर्मन थे, उनोने 1936 -1938 बिच में किया.

पहला digital computer:
Atanasoff-Berry Computer नाम का computer Professor John Vincent Atanasoff 1937 में बनाया.
इसमें vaccum tube का इस्तमाल किया गया था.

पहला Desktop computer:
1964 में पहला डेस्कटॉप computer बनाया गया. जिसे Pier Giorgio Perotto ने इन्वेंट किया था और  Olivetti कंपनी ने निर्माण किया था. उस समय एक computer की कीमत $3200 थी.

पहला personal computer:
1975 Ed Roberts ने पर्सनल computer का concept दुनिया के सामने रखा और पहला पर्सनल computer Altair 8800 बनाया.
देखा जाए तो computer की हिस्ट्री बहुत ही बढ़ी, है, जिसको हमने सिंपल और कम शब्दों में समजाने की कोशिस की है.
इसके बिच में बहुत से बदलाव computer में आते गए, दिन ब दिन computer, अपडेट होता गया, उसका पोर्टेबल वर्शन याने लैपटॉप भी बनाया गया.
मनुष्य को जो जो कमीया पुराने computer में नज़र आती रही, वो उसमे बदलाव करता गया, और लेटेस्ट, एडवांस computer बनाता गया.
                       प्रोसेसर, मेमोरी में भी यही होता है, आज के ज़माने में हम लेटेस्ट प्रोसेसर जैसे i3, i5, i7 का इस्तमाल कर रहे है.
तो ये थी computer के खोज की हिस्ट्री ये आपको कैसी लगी कमेंट में जरुर बताए. साथ में कोई सुजाव हो तो वो भी बताए.
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Computer Laptop में Wi-Fi Hotspot कैसेशुरू करे
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Blogger Dashboard Ki Puri Jankari Hindi Me

Blogger Dashboard Ki Puri Jankari Hindi Me
New blog start karane wale hai, to is post ko jarur read kare, taki new blogger ko easily samaj me aaye ki blogger dashboard kya hota hai.

Blogger Dashboard Ki Jankari



Blogger dashboard me jo option hote hai, unka use kya hota hai, kis prakar hum apne blog me unka istamaal kar sakate hai, iski sari Jankari aapko mil jayegi.

Blogger Dashboard Details:

Sabse first apne email id se blogger account me sign in karle. Ab aapke samane 1 page kulega.
Agar aapke pass ek hi email se banaye hue kayi blog honge to uski list aapko waha pe dikhayi degi. Ab jis blog bar hume work karana hai, uske name pe click kare.
Ab usme upar hume 3 option dikhayi denge jo aap niche image me dekh sakate hai.

 Top Par 3 Option Honge


Blogger name se age jo 3 options hai:
1. Jo pencil ki tarah dikhayi deta hai, wo new post likhane ke liye use kiya jata hai.
2. Uske agge jo option hai, wo humari puri blog post jo humane publish kar di hai, unki list dikhayi degi.
3. View Blog: ispar click karate hi humara blog open ho jata hai.



Ab aate hai, niche right side me aapko total 11 option dikhayi dege jo aap niche image me dekh sakate hai. Unka use niche diya gaya hai.

Blogger dashboard details


1. New Post:
Yaha se bhi new post likhane ke liye editor open ho jata hai.

2. Overview:
Yaha pe humare blog ki puri details jaise
Waiting me kitni comment hai, aur kitni comment publish ki hai.
Day ke kitane pageview hue hai. Total kitni post publish ki hai, aur kitne follower hai, isi Jankari hume yaha overview me dikhayi degi.


3. Posts:
Yaha se hum apni puri post jo publish ki hai, post kab publish ki thi uski date, draft me save ki hai, wo dekhane ko milegi. Yaha se hum post ko edit, delete bhi kar sakate hai.

4. Pages:
Hume agar new page create karane hai, jaise contact us, about us, privacy page yaha se create kar sakate hai. Ya published page ko edit bhi kar sakate hai.


5. Comments:
Jitni bhi comment chahe wo waiting me ho ya, published ho wo hum yaha se dekh sakate hai.

6. Stats:
Yaha pe humare blog ka pura statistics yane daily traffic, overview, today, yesterday, Last month, All Time ke visitor hume yaha se dekhane ko milate hai.



7. Earning:
Agar aapne blogger par google ki ads lagayi hai, to aapko wo yaha se dekhane ko milati hai, unko kis tarah post me lagana hai, wo setting yaha se kar sakate hai.


8. Campaigns:
Yaha se hum ad create karake humare blog ke liye visitor la sakate hai, Google adword ki help se.

9. Layout:
Blog ki sabhi designing yaha se ki jati hai, jaise blog template me kisi gadget ko add ya remove karana.

10. Template:
 Blogger ki template change karane ke liye, new template upload karane ke liye, jo template hai, uska backup lene ke liye yaha se option hume mil jata hai.
Mobile me template ko kaise show karana hai, wo bhi hum yaha se set kar sakate hai.

Also Read:

11. Setting:
Blog ki basic se lekar, advanced setting hume is option ke jariye hi karani hoti hai.
To ab aapko samaj aaya hoga ki blogger dashboard kya hota hai, jo option hote hai, unka kya use hota hai.



Agar aapke ke man me koi sawal ya sujaw ho to aap comment me jarur bataye.
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4 Tips Google Chrome Ki Speed Badane Ke Liye

4 Tips Google Chrome Ki Speed Badane Ke Liye
90% से भी ज्यादा यूजर computer में इन्टरनेट चलाने के लिए google chrome browser का इस्तमाल करते है. बहुत से लोगो का google chrome browser बहुत स्लो वर्क करता है, वेबसाइट ओपन होने में काफी वक़्त लगता है.

Google chrome speed up tips

तो आज हम जानते है, की कैसे google chrome ब्राउज़र की speed बडाई जा सकती है. किसी भी ब्राउज़र में इनबिल्ट कुछ Plugin, extension आते है, और इन्टरनेट का इस्तमाल करते समय हमसे भी कुछ Plugin, extension हो जाते है. ये Plugin, extension हमारे काम के नहीं होते है, तो इसको हम रिमूव कर के ब्राउज़र की स्पीड बडाई जा सकती है.

Google Chrome की Speed बढ़ाने के लिए 4 Tips

1. History, Cache, को डिलीट करे:
जब हम ब्राउज़र में कोई वेबसाइट ओपन करते है, तब उसकी हिस्ट्री और कैश डाटा हमारे ब्राउज़र में सेव हो जाता है. हम जितनी भी वेबसाइट को विजिट देते है, उनका सारा रिकॉर्ड हिस्ट्री में सेव हो जाता है.
हम जो भी चीज़ ब्राउज़र से डाउनलोड करते है, उसकी भी हिस्ट्री सेव हो जाती है. इससे हमारा ब्राउज़र काफी स्लो वर्क करता है.


इसलिए हमे हर हफ्ते में एक बार ब्राउज़र की हिस्ट्री क्लियर करनी चाहिए.
इसके लिए ब्राउज़र के एड्रेस बार में chrome://history/ टाइप करे और enter करे.
जो पेज ओपन होगा उसमे clear browsing data पर click करे.
अब न्यू विंडो में
Browsing history
Download history
Cookies and other plugin data
Cached Images and files

Chrome history

इन को tick mark और clear browsing data पर click करे

2. Chrome extension को रिमूव करे:
हमारे ब्राउज़र में कई तरह के extension होते है, वो इसलिए होते है, की हमे किसी वेबसाइट पर जाने की जरुरत ना पड़े, या फिर अलग अलग ad blocker, download manager इस तरह के extension होते है, उसमे से जो हमारे काम के नहीं उनको हमे रिमूव कर देना है.
रिमूव करने के लिए एड्रेस बार में chrome://extensions/ डाल के enter प्रेस करे.

google chrome extention

अब आपके सामने सभी इनस्टॉल extension दिखाई देंगे. अगर आपको जो extension रिमूव करना है, उसके सामने delete का जो sign है, इसपर click करना है.



3.
Chrome apps को रिमूव करे:
chrome ब्राउज़र में से हमे जो application होते है, उनको हटा देना है. उसके लिए ब्राउज़र के एड्रेस बार में chrome://apps/ डाल के enter प्रेस करे.

Apps

अब जो application इनस्टॉल है, उनको एक एक करके रिमूव करना है, उसके लिए उस application पर right click करना है, फिर Remove from chrome पर click करे.

4. Chrome Plugin को रिमूव करे:
प्लगइन याने एक प्रकार का application है होता है. जैसे फ़्लैश प्लेयर, पीडीऍफ़ व्यूअर इन जैसे प्लगइन google chrome के साथ वर्क करते है, जो google chrome की स्पीड को कम करते रहते है.
हमारी जरुरत के हिसाब से हम चाहे तो इनको disable भी कर सकते है.


Plugin disable kare


इनको disable करने के लिए ब्राउज़र के एड्रेस बार में chrome://plugins/ लिख कर enter करना है.
enter करते ही हमारे सामने जो जो प्लगइन ब्राउज़र में इनस्टॉल होंगे वो दिखाई देंगे.
जो प्लगइन हमारे काम के नहीं है, उनको सामने disable पर click करे.
इस प्रकार अगर आप इन दी गई 4 टिप्स को फॉलो करते हो, तो आपका google chrome ब्राउज़र जरुर फ़ास्ट वर्क करने लगेगा.
Also read:
अगर आपको इससे स्मबंदित कुछ प्रॉब्लम, कोई सुजाव हो तो आप कमेंट में बता सकते है.
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कंप्यूटर और इन्टरनेट जगत से जुड़े कुछ टेकनिकल वर्ड

कंप्यूटर और इन्टरनेट जगत से जुड़े कुछ टेकनिकल वर्ड
आज दिन ब दिन इन्टरनेट और कंप्यूटर का इस्तमाल बड़ता ही जा रहा है, इस बदलती दुनिया में हमे हर रोज कोई न कोई नया शब्द सुनने को मिलता है. तो आज हम ऊनी टेकनिकल वर्ड के बारे में जानते है, की उस वर्ड का मतलब क्या है, और ये क्यों इस्तमाल किया जाता है.
Computer aur internet world and terms

ये जो वर्ड है, इनका मतलब हर एक इन्टरनेट इस्तमाल करने के वाले को पता होना जरुरी है. क्यों इस तरह के वर्ड हमारे डेली लाइफ में use होते है.

कंप्यूटर और इन्टरनेट जगत से जुड़े कुछ टेकनिकल वर्ड :

1. ASCII (American Standard Code For Information Interchange):
इसको आस्की एसा कहा जाता है, ये एक इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड है, जो नंबर, लैटर, सिंबल को दरसाने के लिए ० तो २७ तक के नंबर का इस्तमाल किया जाता है. इस तरह का टेक्स्ट हम किसी भी network, प्लेटफार्म पर इस्तमाल कर सकते है.

2. Binary:
बाइनरी एक नंबर सिस्टम है, computer को हमारी भाषा समज में नहीं आती है, वो बाइनरी नंबर सिस्टम को ही अंडरस्टैंड कर सकता है, इसमे सिर्फ 2 ही डिजिट होते है, ० और 1 जीने बिट कहा जाता है.

3.Browser :
जब भी इन्टरनेट की बात आती है, तब ये वर्ड हमे सुनने को मिलता है. ब्राउज़र याने एक सॉफ्टवेर होता है, जिसका इस्तमाल इन्टरनेट से जुड़ने के लिए होता है. ब्राउज़र की मदद से हम इन्टरनेट चला सकते है, किसी भी वेबसाइट को विजिट कर सकते है. अगर हमारे computer, मोबाइल में ब्राउज़र नहीं है, तो हम इन्टरनेट का इस्तमाल नहीं कर सकते.
उदहारण:
computer के लिए : mozilla firefox, google chrome, internet exploror
मोबाइल के लिए: uc web browser, opera mini



4. client:
जिस computer के जरिए हम रिक्वेस्ट भेजते है, उसको client कहा जाता है, याने किसी network में हम जो अलग अलग computer use करते है, उसको client कहा जाता है, और जो main computer सबको सर्विसेज देता है, उसको हम सर्वर कहते है.

5. Cyberspace :
साइबर स्पेस एक बहुत ही बड़ी टर्म है, साइबर स्पेस याने computer, इन्टरनेट और, सभी इलेक्ट्रॉनिक चीज़े इन का संबंद आता है.

6. Cyber Crime:
इन्टरनेट, computer, इलेक्ट्रॉनिक चीज़े के जरिए, या उनसे रिलेटेड, कोई भी गुना साइबर क्राइम कहा जाता है.
याने किसी का पर्सनल डाटा चोरी करना etc.


7. Downloading:
एक इलेक्ट्रॉनिक चीज़ से दूसरी इलेक्ट्रॉनिक चीज़ में डाटा ट्रान्सफर करने को ही डाउनलोडिंग कहा जाता है.
इन्टरनेट पर ये टर्म इसलिए use होती है, की इन्टरनेट पर जो डाटा होता है, उसको हम अपने मोबाइल और computer में ट्रान्सफर करते है, इसको डाउनलोड कहा जाता है.



8. Email (Electronic Mail):
इसको हम अपने डेली लाइफ में इस्तमाल करते है. ईमेल याने इलेक्ट्रॉनिक मेसेज को एक यूजर से दुसरे यूजर को ट्रान्सफर करना होता है.
पोपुलर ईमेल प्रोवाइडर:
गीमेल, याहू मेल, रीडिफ़ मेल


9. FAQ’S ( Frequently Asked Question):
किसी भी वेबसाइट पर आपको उस वेबसाइट से रिलेटेड FAQ’S देखने को मिलते है. FAQ’S याने हाल में पूछे गए सवाल. याने किसी भी वेबसाइट पर अगर हम कुछ प्रॉब्लम हो तो हम उससे रिलेटेड क्वेश्चन पूछ सकते है, एसा इसलिए किया जाता है, क्यों की न्यू यूजर का टाइम सेव हो जाए,

10. Firewall:
फ़ायरवॉल इसे हम computer पोलिस कह सकते है. जब भी हम डाटा को इन्टरनेट पर सेंड या रिसीव करते है, तो फ़ायरवॉल इसके बिच में सिक्यूरिटी का काम करता है.

11. FTP(File Transfer Protocol):
ये एक प्रोटोकॉल है, जिसका इस्तमाल फाइल को सेंड करने के लिए किया जाता है.

12. GIF( Graphics Interchange Format )
इमेज का ये स्टैण्डर्ड फॉर्मेट है. gif इमेज आम तौर एनीमेशन इमेज होती है, जो हिलती हुई दिखाई देती है.

13. Homepage :
जब भी हम ब्राउज़र ओपन करते है, तो हमारे सामने जो पेज खुलता है, उसको ही होमपेज कहा जाता है.

14. HTML (Hypertext Markup Language ):
html एक वेबपेज डिजाईन करने की भाषा है. इसके जरिए हम static और dynamic दोनों तरह के webpage डिजाईन कर सकते है.


15. HTTP( Hypertext transfer Protocol):
ये प्रोटोकल इन्टरनेट पर जो document, इनफार्मेशन है, उसको एक्सेस करने के लिए इस्तमाल किया जाता है.

16. OTP (One TIme Password ):
वन टाइम पासवर्ड याने एक पासवर्ड होता है, जो सिक्यूरिटी के लिए भेजा जाता है. ये पासवर्ड कुछ ही सेकंड, या मिनट के लिए होता है, और ये एक ही बार इस्तमाल होता है.



इसके आगे के टर्म्स हम जल्द ही अपडेट करने वाले है, अगर आपको भी कोई टर्म पता नहीं है, जो आप जानना चाहते है, वो आप हम कमेंट में suggest कर सकते है.
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