Vodafone All USSD Codes Mobile Number, Internet Data Check करनें के लिए

Vodafone All USSD Codes Mobile Number, Internet Data Check करनें के लिए

Vodafone में अपना mobile number, internet balance, 2G, 3G, 4G Plans चेक करने के USSD Codes.

Vodafone All USSD Codes

कभी कभी हमे अपना इन्टरनेट डाटा चेक करने की जरुरत पड़ती है. तो कही रिचार्ज करते समय offers चेक करने के लिए ussd कोड की जरुरत होती है.

तो आज हम आपको वोडाफोन के सभी USSD कोड के बारे में बताने जा रहे है, जिसकी जानकारी वोडाफोन यूजर को होनी चाहिए.

Vodafone ussd codes, की मदद से हम Vodafone Balance Check, Vodafone net balance Check, Vodafone Internet Data offers check कर सकते है.

Vodafone All USSD Codes

Code
Description/Use
*141# or *111#
Check Talk time Balance
*111*6# or Sms DATA BAL to 144
Vodafone 3G/4G Balance Check
*141*9#
2G Balance Check
*121#
Best Offers
*145#
Call balance check
*148#
Minute balance check
*123*8#
Night GPRS Balance check
1909
Vodafone DND Activation
121
Latest offers


वोडाफोन से वोडाफोन पर अगर आप बैलेंस ट्रान्सफर करना चाहते है तो :
*131*<amount>*<receiver number>#

अगर वोडाफोन का मोबाइल नंबर पोर्ट करना चाहते है तो :
SMS PORT<space><mobile Number>  to 1900

Vodafone 4G/3G Internet Data Packs


USSD Code
Price
Benefits
*444*11#
Rs.11
45MB
*444*27#
Rs.27
100MB
*444*37#
Rs.37
150MB
*444*65#
Rs.65
260MB
*444*128#
Rs.128
1GB

        
         ·        Airtel All USSD Codes



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Linux Operating System in Hindi–Linux ऑपरेटिंग सिस्टम की जानकारी

Linux Operating System in Hindi–Linux ऑपरेटिंग सिस्टम की जानकारी

Learn Linux Operating System in Hindi, Linux Kya Hai. Feature of Linux. Linux ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले है.

Learn Linux Operating System in Hindi

History of Linux:

Linux एक ऑपरेटिंग सिस्टम है? ऑपरेटिंग सिस्टम जिस प्रकार दूसरी ऑपरेटिंग सिस्टम है, जैसे विंडोज, एंड्राइड आदि. Operating system का काम होता है, कंप्यूटर के रिसोर्स, मेमोरी, हार्डवेयर को मैनेज करना.
Linux ऑपरेटिंग सिस्टम ओपन सोर्स (Open Source) याने फ्री है, इसके लिए हमे पैसे देने की जरुरत नहीं है. इसका कोड सभी के लिए इन्टरनेट पर मौजूद है.

Linux का निर्माण 1991 में लायनस टोरवाल्ड ने किया जब वो computer science के स्टूडेंट थे.
लायनस टोरवाल्ड ने unix ऑपरेटिंग सिस्टम से प्रेरित होकर अपनी खुद की ऑपरेटिंग सिस्टम बना दी. जीसको नाम दिया गया linux. इसका कोड इन्टरनेट पर रख दिया गया, ताकि हर कोई इसको एक्सेस कर सके. इसमें सुधार एव बदलाव कर सके.

Linux Features – लिनक्स की विशेषताए:

1. सबसे पहली बाद लिनक्स का kernal इस्तमाल कर हम अपनी खुद की custom operating system बना सकते है.

2. linux सबसे पोपुलर और सबसे ज्यादा इस्तमाल होने वाला कर्नल है.

3. लिनक्स कर्नल Debian, Knoppix, Ubuntu & Fedora का Backbone है.

4. विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह ये paid नहीं है. ये हमे फ्री में मिलती है.
5. अभी इन्टरनेट पर कइ प्रोग्राम है, जो फ्री में मौजूद है, जिनका इस्तमाल हमे linux में करते है.

6. अगर हम अपने कंप्यूटर में linux इनस्टॉल कर है. तो हमे antivirus की जरुरत नहीं पड़ेगी. linux हाइली सिक्योर ऑपरेटिंग सिस्टम है.

7. Linux Multi User Operating System है, जिस पर एक साथ कई यूजर काम कर सकते है.

8. linux में apache नाम का एक प्रोग्राम होता है. जिसका प्रयोग वेब developement में होता है.
linux ऑपरेटिंग सिस्टम ओपन सोर्स होने के कारण बहुत ही पोपुलर है.

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Computer में RAM क्या होती है, इसके Types और Price

Computer में RAM क्या होती है, इसके Types और Price

कंप्यूटर RAM क्या है, इसके कितने प्रकार है, और RAM की प्राइस क्या है, आज हम जानते है.
जब हम कंप्यूटर खरीदने जाते है, तब हमे कंप्यूटर का configuration तय करना होता है. याने की हमे प्रोसेसर कौन सा लेना है, हार्ड डिस्क कितने GB स्टोरेज की लेनी है और साथ में RAM कितने GB की लेनी है. 

Computer RAM ki Jankari

लेकिन अगर हमे RAM के बारे में जानकारी नहीं होगी तो हम ये तय नहीं कर पाएंगे. तो चलिए जानते है, RAM का इस्तमाल क्या होता है.

Computer RAM:

RAM को random access memory कहा जाता है. ये कंप्यूटर की इंटरनल मेमोरी होती है. जिसमे CPU के data. program, और program result में सेव होते है.
RAM में actual जिस डाटा पर काम हो रहा है, वो डाटा होता है.

RAM ये erasable मेमोरी है, याने अगर किसी डाटा पर हम काम रहे है, और तभी बिजली चली जाए तो वो डाटा इरेस हो जाता है. RAM में जो डाटा उसे कंप्यूटर randomly एक्सेस करता है.
RAM को volatile मेमोरी कहा जाता है.
कंप्यूटर में हमे आम तौर पर 1GB, 2GB, 4 GB की RAM देखने को मिलती है. कंप्यूटर RAM जितनी ज्यादा हो उतना कंप्यूटर फ़ास्ट वर्क करता है.

RAM के प्रकार :

RAM के मुख्य तौर पर 2 प्रकार है.
1. Static RAM (S- RAM):
2. Dynamic RAM (D- RAM):

1. Static RAM (S- RAM):
Static RAM में ट्रांजिस्टर का इस्तमाल किया जाता है. D- RAM की तुलना में इसमें ज्यादा च्पिस का use किया जाता है, इसलिए इसकी कीमत ज्यादा है. Static RAM में कैश मेमोरी का इस्तमाल किया जाता है, जिसके ऑपरेशन जल्दी पूरा हो जाता है.

2. Dynamic RAM (D- RAM):
D-RAM में continue डाटा रिफ्रेश होता रहता है. D-RAM में डाटा continue रिफ्रेश होता है, इसलिए ये प्राइस में कम है, और मेमोरी साइज़ में भी कम होती है, S-RAM की तुलना में.

RAM Price:
RAM की कीमत उसकी साइज़ और बनाने वाली कम्पनी पर निर्भर होती है. उसमे कुछ निचे दी गयी है.
Hynix 667FSB 1GB DDR2 RAM- Rs.369
Kingston KVR800D2N5/1G DDR2 1GB - Rs.370
Simmtronics 2GB DDR3 1333Mhz Laptop Ram- Rs.950
Transcend DDR3 4GB Laptop RAM -Rs.1495
तो अब आपको जानकरी हो गयी है, की RAM क्या है, और इसकी प्राइस क्या है.
अगर इसके बारे में आपका कोई सुजाव हो तो आप कमेंट में बता सकते है.
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Software क्या होता है? Application & System Software

Software क्या होता है? Application & System Software

Software क्या होता है? सॉफ्टवेर ये कंप्यूटर में इस्तमाल होने वाला सबसे मोस्ट इम्पोर्टेन्ट concept है.
सॉफ्टवेर ये टर्म कंप्यूटर की फंडामेंटल टर्म है, जिसके बारे में हर किसी को मालूम होना जरुरी है. 

What is Software

सॉफ्टवेयर क्या है?

Software is nothing but collection of programs which is used to perform particular task.
सॉफ्टवेर याने प्रोग्राम होता है, जिसमे नंबर ऑफ़ लाइन्स का कोड्स होता है. सॉफ्टवेर को किसी खास टास्क को कम्पलीट करने के लिए बनाया जाता है.
हमे पता है, की हार्डवेयर को हम टच कर सकते है, लेकिन Software को सिर्फ हम देख सकते है, फिजिकली टच नही कर सकते. कंप्यूटर चलाने के हमे अलग अलग सॉफ्टवेर की जरुरत पड़ती है.
हार्डवेयर को सॉफ्टवेर के जिरए मैनेज किया जाता है. अगर सॉफ्टवेर ना हो तो हार्डवेयर पार्ट का कोई महत्व नहीं है.



सॉफ्टवेयर के मेन 2 प्रकार है:

1. System Software
2. Application Software

1. System Software - सिस्टम सॉफ्टवेयर:
सिस्टम सॉफ्टवेयर कलेक्शन है प्रोग्राम का, जो कंप्यूटर सॉफ्टवेर पर कण्ट्रोल, उनको ऑपरेट करने के लिए बनाया गया है.
इन सॉफ्टवेर को कंप्यूटर मैन्युफैक्चरर के द्रारा बनाया जाता है.
सिस्टम सॉफ्टवेर का सबसे बेस्ट उदाहरण है, ऑपरेटिंग सिस्टम. कंप्यूटर को चलाने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम का इनस्टॉल होना जरुरी है. ऑपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर और सॉफ्टवेर दोनों के बिच ब्रिज (पूल ) का काम करती है.
सिस्टम सॉफ्टवेर के उदाहरण:
ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्पाइलर, इंटरप्रिटर , असेम्बलर

2. Application Software – एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर:
ये वो सॉफ्टवेर होता है, जिसे हम अपनी रोज़ मर्रा की जिंदगी में हम इस्तमाल करते है.
जैसे अगर हमे कुछ लिखना है, नोट्स बनाने है, लैटर लिखना है, तो हम ms- word का इस्तमाल करते है.
अगर हमे कंपनी में काम करने वाले employee की जानकारी , सैलरी, रिपोर्ट बनानी है, तो हम माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल की मदद लेते है. एक्सेल भी एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेर है.
इमेज एडिटिंग के लिए हम एडोबी फोटोशोप का इस्तमाल करते है, वो भी एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेर है.
एप्लीकेशन सॉफ्टवेर को अलग अलग काम करने के लिए बनाना गया है. यूजर की आवश्यकता के अनुसार एप्लीकेशन सॉफ्टवेर को बनाया गया है.
एप्लीकेशन सॉफ्टवेर को सॉफ्टवेर डेवलपर या जो प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में निपुण है, वो वक्ती इसे बना सकता है.



एप्लीकेशन सॉफ्टवेर के उदाहरण:
MS Office, Tally, Adobe Photoshop, Coral draw, PageMaker, KM Player, VLC Media Player etc.
आपके सुजाव और प्रॉब्लम निचे कमेंट में हमसे शेयर कर सकते है. और हमारे लेटेस्ट अपडेट के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करे और सब्सक्राइब करना ना भूले.


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Networking Types In Computer - कंप्यूटर नेटवर्किंग और टाइप्स

Networking Types In Computer - कंप्यूटर नेटवर्किंग और टाइप्स
Computer Network के types बारे में आज हम जानते है, बेसिक नेटवर्किंग टाइप्स के बारे में discuss करते है.

Computer Network Types In Hindi


Network को basically उसके geographical area के अनुसार विभाजित किया गया है. Network छोटे से छोटा याने एक मोबाइल और computer के बिच हो सकता है, या फिर बड़े से बड़ा याने internet की तरह हो सकता है जिसने पुरे world को कवर किया हुआ है..



Geographical area के अनुसार network के निचे दिए गए types है:

1. LAN (Local Area Network):
इस प्रकार का network किसी बिल्डिंग में सेटअप किया जाता है, जिसमे कई system को एक साथ कनेक्ट किया जाता है.
Local area network covers कॉलेज, organization, स्कूल, यूनिवर्सिटीज एरिया. LAN में हम 2 सिस्टम का network बना सकते है, या बड़े से बड़ा 50-100 तक भी बना सकते है.
LAN के जरिए हम डाटा, रिसोर्सेज, को शेयर कर सकते है. LAN के जरिए हम, प्रिंटर, स्कैनर, और इन्टरनेट इन जैसे रिसोर्सेज को यूजर के साथ शेयर कर सकते है.
LAN wireless या फिर wired दोनों प्रकार का हो सकता है. LAN में हम 1 किलोमीटर की दुरी पर से दे डाटा सेंड या रिसीव कर सकते है.

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2. MAN (Metropolitan Area Network):
MAN किसी शहर के लिए डिजाईन किया जाता है. इसका बेस्ट  उदाहरण है, Cable TV Network. केबल टीवी network सिर्फ एक शहर के लिए ही डिजाईन किया जाता है.  MAN में हम कई LAN को कनेक्ट कर सकते है.
MAN में हाई-कैपेसिटी और हाई स्पीड के fiber optic cable का इस्तमाल किया जाता है.


3. WAN (Wide Area Network):
इसके नेम से ही पता चलता है, वाइड याने बहुत बड़ा नेटवर्क. WAN में large geographical area को कवर किया जाता है. WAN से जुड़े सभी computer से हम कई हज़ार किलोमीटर तक डाटा को सेंड / रिसीव कर सकते है.
WAN में कई तरह के LAN, MAN को कनेक्ट किया जाता है.
वाइड एरिया नेटवर्क में डाटा को सेंड/ रिसीव करने के लिए communication satellite का इस्तमाल किया जाता है. WAN का उदाहरण देखा जाए तो हम इन्टरनेट ले सकते है.
इन्टरनेट से कई प्रकार के network आपस में कनेक्ट होते है. जिसके जरिए हम हमारा डाटा को आपस में शेयर करते रहते है.
तो ये बेसिक network के types है, जिसका प्रयोग किसी भी networking में किया जाता है. वैसे तो और भी प्रकार है, जैसे SAN, PAN etc. पर ऊपर दिए गए 3 मोस्ट important टाइप्स है.


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